चुनावी मौसम अपने पूरे चरम पर है।इसे देखते हुए क्यों न आज जम्मू-कश्मीर के उन कुछ राजनीतिक नेताओं की बात की जाए जो ग्रामीण परिवेश से आए और जिन्होंने सुविधा संपन्न शहरी इलाकों से जुड़े रहे कई राजनीतिक नेताओं के मुकाबले ज़्यादा सफल राजनीतिक पारी पूरी मजबूती के साथ खेली ।
हकीकत भी यही है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले राजनीतिक नेताओं का प्रदेश की राजनीति में ज़बरदस्त दबदबा रहा है और गांवों-कस्बों से जुड़े राजनीतिक नेताओं ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पूरी ताकत के साथ कामयाब भूमिका निभाते हुए इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े ऐसे नेताओं की सूची में कई नाम सामने आते हैं, जो हर तरह से सफल रहे और जिनका प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में अहम योगदान रहा है ।
सबसे बड़े व सफल राजनीतिक नेताओं में, पंड़ित गिरधारी लाल शर्मा, पंड़ित मंगतराम शर्मा, बेली राम शर्मा, मदन लाल शर्मा और लाला शिवचरण गुप्ता जैसे कुछ नाम प्रमुख हैं, जिन पर आज हम चर्चा करेंगे ।इन नेताओं ने प्रदेश की राजनीति में लंबी व कामयाब पारी खेली है और इन सभी को उनके प्रशंसक व आलोचक आज भी सम्मान के साथ उन्हें याद करते हैं ।
पहले बात पंड़ित गिरधारी लाल डोगरा की ।लगभग 26 साल तक जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री रहे पंड़ित गिरधारी लाल शर्मा कठुआ ज़िले के हीरानगर क्षेत्र के रहने वाले थे और उन्होंने हीरानगर विधानसभा का पांच बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।वैसे तो पूरे प्रदेश में पंड़ित गिरधारी लाल डोगरा बेहद लोकप्रिय व ताकतवर नेता के रूप में जाने जाते थे मगर कठुआ व हीरानगर में उनकी लोकप्रियता के आगे उनका कोई प्रतिद्वंद्वी कभी भी ठहर नही सका।उनकी सक्रियता व लोकप्रियता को लेकर आज भी हीरानगर और उसके आसपास के इलाकों में कई किस्से मशहूर हैं।
पंड़ित गिरधारी लाल डोगरा के लगभग समकक्ष रहे पंड़ित मंगतराम शर्मा भी लोकप्रिय व एक मज़बूत नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं।अपने सरल स्वभाव के बल पर वे अपने राजनीतिक दुशमनों के दिल में भी आसानी से जगह बना लेते थे।लेकिन उनकी ‘चाणक्य’ के रूप में बनी पहचान उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की नींद उड़ाने का काम अक्सर किया करती थी।राजनीतिक पंड़ित आज भी मानते हैं कि पंड़ित मंगतराम शर्मा के राजनीतिक दांवपेच के आगे बड़े-बड़े राजनीतिक नेता भी पानी भरा करते थे।
कठुआ के करीब एक गांव के रहने वाले पंड़ित मंगतराम शर्मा ने साठ के दशक से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और एक लंबी पारी खेली।सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बावजूद पंड़ित मंगतराम शर्मा एकमात्र ऐसे नेता कहे जा सकते हैं जो लखनपुर से लेकर कुपवाड़ा और लद्दाख तक एक-समान लोकप्रिय थे।उनकी हाज़िरजवाबी के किस्से-कहानियां आज भी सचिवालय के गलियारों से लेकर गांव की चौपाल तक लोग सुनते और सुनाते हैं।
आज भी प्रदेश के कई राजनीतिक नेता उन्हें अपना गुरु मानते हैं और उन जैसा ही बनना चाहते हैं।
पंड़ित गिरधारीलाल डोगरा व पंड़ित मंगतराम शर्मा की तरह ही पंड़ित बेलीराम शर्मा ने भी प्रदेश की राजनीति में अपनी ज़बरदस्त धाक जमाई। नौशेहरा-सुंदरबनी क्षेत्र से लेकर पूरे राजौरी-पुंछ ज़िलों में उनकी लोकप्रियता आज भी कायम है।लोग उनकी सादगी के किस्से आज भी सम्मान के साथ सुनते व सुनाते हैं।
पंड़ित बेलीराम शर्मा ने छह बार नौशेहरा-सुंदरबनी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनकी सादगी व ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
उपरोक्त नेताओं की तरह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में ग्रामीण परिवेश से आए मदन लाल शर्मा ने भी अपनी एक अलग पहचान बनाई । जम्मू ज़िले की अखनूर तहसील के सीमावर्ती छपरियाल गांव के रहने वाले मदन लाल शर्मा ने एक सैनिक के रूप में जीवन यात्रा शुरू करने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक लंबी पारी खेली।विधायक व मंत्री तक बनने के बावजूद उन्होंने अपने पैतृक गांव से अपना नाता नही तोड़ा और अपना ज़्यादा जीवन गांव में ही बिताया।
एक और नाम जिसे प्रदेश के लोग आज भी याद रखते हैं वह लाला शिवचरण गुप्ता का है।उन्होंने उस समय अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की जब उनकी कर्मभूमि उधमपुर एक छोटे से कस्बे के रूप में जाना जाता था।कस्बा भी ऐसा कि जो गांव से थोड़ा बड़ा था और किसी कस्बे से थोड़ा छोटा।
लाला शिवचरण गुप्ता जनसंघ-भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए थे। इस पार्टी में शुरू से ही जम्मू नगर के नेताओं का दबदबा था। मगर बावजूद इसके तेज तरार छवि की बदौलत लाला शिवचरण गुप्ता ने अपनी एक अलग पहचान बनाई और तीन बार उधमपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
(मनु श्रीवत्सा, जम्मू और कश्मीर में एक प्रमुख हिंदी पत्रकार हैं, जो क्षेत्र की राजनीति की जटिलताओं में अच्छी तरह से विशारद हैं। उनका व्यापक अनुभव विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के लिए लेखन में है। इसके अलावा, वह गांव ट्रिब्यून के संपादकीय सलाहकार भी हैं !)