अश्वनी कुमार
जम्मू कश्मीर और लद्दाख की छह संसदीय सीटो में से तीन संसदीय सीटे बीजेपी के लिए ‘हॉट सीटे’ बनती दिखाई दे रही है और उनको बचाने के लिए पार्टी दिल जान से पूरी कोशिश में लगी हुई है ।
इन तीन सीटो में उधमपुर -डोडा -कठुआ संसदीय सीट, अनंतनाग -राजौरी की सीट और लद्दाख की सीट शामिल है । जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावो से पहले दोनों यूनियन टेर्रोटोरी की छह संसदीय सीटे बीजेपी के लिए सेमी फाइनल इलेक्शन बन गया है । जम्मू कश्मीर विधान सभा के चुनाव दस सालो के बाद इस साल सितम्बर से पहले होने है और इस बारे सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दे दिए है।
प्रधानमंत्री , नरेंद्र मोदी के सबसे नज़दीक मंत्री, जो सात मंत्रालय का कामकाज देख रहे है, डॉ जितेंद्र सिंह, उधमपुर-डोडा -कठुआ संसदीय सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। इस सीट पर पहले फेज 19 अप्रैल को वोटिंग हो रही है। इससे पहले वह जम्मू मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में लेक्चरर थे। 2008 अमरनाथ आंदोलन के दौरान वह काफी सक्रिय होंगे थे और बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन कर ली थी।

उधमपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार , चौधरी लाल सिंह का सीधा मुक़ाबला, डॉ जितेंद्र सिंह के साथ होने जा रहा है । इससे पहले चौधरी लाल सिंह ,उधमपुर – डोडा -कठुआ सीट से दो बार कांग्रेस के उमीदवार के तौर पर चुनाव जीत चुके है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने 2014 लोक सभा चुनावो में उनका टिकट काट कर ,पूर्व मुख्यामंत्री , गुलाम नबी आज़ाद को चुनाव लड़वाया था। आज़ाद बाद में डॉ जितेंद्र सिंह से बुरी तरह से चुनाव हार गए थे। इस बार उधमपुर सीट पर मुक़ाबला तिकोना होने जा रहा है जबकि गुलाम नबी आज़ाद की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी ने पूर्व मंत्री ,जी एम सरूरी को चुनाव में खड़ा कर दिया ।
उधमपुर -डोडा -कठुआ सीट बीजेपी के लिए प्रितष्ठा की सीट बन गयी है और इस सीट के लिए प्रधानमंत्री , नरेंद्र मोदी , उत्तर प्रदेश के मुख्यामंत्री , योगी आदित्य नाथ , बीजेपी प्रधान , जे पी नड्डा , रक्षा मंत्री , राज नाथ सिंह के इलावा दर्ज़नो बीजेपी के वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार में आ रहे है। डॉ जितेंद्र सिंह विकास के नाम पर वोट मांग रहे है और उनका कहना है कि देश की यह ऐसी संसदीय सीट है जहा सबसे ज्यादा विकास हुआ है जिनमे तीन मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार, चौधरी लाल सिंह सीबीआई और ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को लेकर, सहानुभूति के नाम पर लोगो से वोट मांग रहे है। यही कारण है कि, डॉ जितेंद्र सिंह का इस बार सीधा मुक़ाबला चौधरी लाल सिंह के साथ होने जा रहा है । इस संसदीय सीट पहाड़ी होने की वजह से लाल सिंह चुनावी रैलियों चॉपर से कर रहे है।

इस सीट पर 2019 लोक सभा चुनावो में कांग्रेस के उम्मीदवार और डॉ करण सिंह के बड़े बेटे , विक्रमादित्य सिंह ने 367059 वोट लिए थे। लाल सिंह हाल ही में जेल से बैल पर बाहर आये है. जबकि इ डी ( इनफोरेस्मेंट डायरेक्टरेट ) ने उनकी पत्नी के खिलाफ केस दर्ज़ करके लाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। लाल सिंह वोटरों से सहानुभूति के नाम पर वोट मांग रहे है। लाल सिंह गांव गांव जाकर लोगो से पैदल जाकर वोट मांग रहे है। डॉ जितेंद्र सिंह को पिछली बार कठुआ जिले ने जितवाया था लेकिन इस बार लाल सिंह को वहां से सहानुभूति के वोट मिलने की उम्मीद है कयोकि लाल सिंह कठुआ के रहने वाले है। लाल सिंह कठुआ के लोगो को यह भी कह रहे है कि बीजेपी सरकार बाहर के उद्योगपतियों को यहाँ बसा कर उनकी जमीने के मालकाना हक़ ले लगे। जी एम सरूरी डोडा जिले से सेक्युलर वोट काटने के इलावा कुछ नहीं कर सकते जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा। लेकिन ,नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने उधमपुर -कठुआ और जम्मू रियासी सीट के लिए कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है। नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान , डॉ फ़ारूक़ अब्दुल्लाह कांग्रेस के उमीदवारो के जलसों को सम्बोधित कर रहे है। उमर अब्दुल्ला ने भी घोषणा की है कि वह भी दोनों सीटो पर चुनाव प्रचार करेगे।
जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की 2022 रिपोर्ट के बाद , जम्मू के दो सीमावर्ती जिलों , पूँछ और राजौरी को जम्मू संसदीय सीट से काट कर कश्मीर के अनंतनाग जिले के साथ जोड़ दिया है और इस नई सीट का नाम , अनंतनाग -राजौरी संसदीय सीट रखा गया है। पीडीपी के प्रधान और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यामंत्री , मेहबूबा मुफ़्ती , नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व मंत्री और गुज्जर धर्म गुरु , मिया अल्ताफ, अपनी पार्टी के ज़फर इकबाल मन्हास और पूर्व मुखयमंत्री , गुलाम नबी आज़ाद भी यहाँ से चुनाव लड़ने जा रहे है। बीजेपी ने अभी तक यहाँ से अपने उम्मीदवार की घोषण नहीं की है। लेकिन माना जा रहा है पार्टी प्रधान , रविंदर रैणा बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते है। गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि पार्टी ने तो घोषणा कर दी है कि वह अनंतनाग -राजौरी से उम्मीदवार होंगे लेकिन अभी तक उन्होंने फैसला नहीं किया हैं कि वह संसदीय सीट से चुनाव लड़ेगे या नहीं। इधर ,बीजेपी ने अभी तक इस सीट से किसी का नाम घोषित नहीं किया है। लगता है कि गुलाम नबी आज़ाद बीजेपी और अपनी पार्टी से कोई सांठगाँठ कर रहे हो जिससे उनके जितने के 100 परसेंट चांस हो जाये।
अनंतनाग -राजौरी सीट दूसरे नंबर पर हॉट सीट बन गयी है कयोंकि यहाँ से दो पूर्व मुख्यामंत्री , मेहबूबा मुफ़्ती और गुलाम नबी आज़ाद चुनाव लड़ेंगे। मेहबूबा मुफ़्ती 2014 में अनंतनाग संसदीय सीट से मोदी वेव में भी जीत गई थी । लेकिन 2019 संसदीय चुनावो में यहाँ से नेशनल कांफ्रेंस के नेता , जस्टिस हसनैन मसूदी चुनाव जीते थे और मेहबूबा तीसरे नंबर पर आई थी। बीजेपी के लिए यह सीट इस लिए महत्वपूर्व बन गई है कयोकि अनंतनाग -राजौरी संसदीय सीट उनकी सरकार के दौरान ही बनाई गई और सबसे ज्यादा गुज्जर -बकरवाल और पहाड़ी वोटर इसी सीट में है। मगर ,अनंतनाग जिले में अधिकतर वोट्स कश्मीरी है। बीजेपी को उम्मीद है कि अनंतनाग -राजोरी संसदीय सीट वह जीत लेंगे कयोकि गुज्जर बकरवाल और पहाड़ी वोट उनकी पार्टी को मिलेंगे। बीजेपी ने हाल ही में दोनों समुदायों को शेड्यूल ट्राइब का स्टेटस दिया है। लेकिन दूसरी तरफ , नेशनल कांफ्रेंस ने गुज्जर समुदाय के धर्मगुरु और दिंवगत नेता , मिया बशीर के बेटे , मिया अल्ताफ को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। अब देखना यह है कि गुज्जर -बकरवाल वोटर अपने धर्म गुरु को वोट डालेंगे या बीजेपी को। क्योकि बीजेपी ने उनको उनको एसटी का दर्जा दिलवाया है। अपनी पार्टी के उम्मीदवार , ज़फर मन्हास , जोकि अपने आप पहाड़ी समुदाय से है वह काफी वोट काट सकते है।
जम्मू -रियासी संसदीय सीट में दो बार जीते , बीजेपी संसद , जुगल किशोर शर्मा तीसरी बार अपनी किस्मत अज़मा रहे है। उनका सीधा मुक़ाबला , कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री , रमन भल्ला के साथ हो रहा है। रमन भल्ला को जम्मू के लोग मसिया मानते है और हर वक़त लोगो के काम आते है चाहिए वह सरकार में हो है या न।
श्रीनगर संसदीय सीट भी काफी दिलचस्प बनती नज़र आ रही है यहां से नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान और पूर्व मुख्यामंत्री , डॉ फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने घोषणा की है कि वह इस बार सेहत ठीक न होने की वजह से संसदीय चुनाव नहीं लड़ेंगे। नेशनल कांफ्रेंस ने अपने पूर्व मंत्री और शिया नेता, आगा रुहुल्ला को श्रीनगर संसदीय चुनाव सीट से मैदान में उतारा है जबकि पीडीपी उम्मीदवार , वाहिद उल रहमान परा यहां से चुनाव लड़ रहे है।
बारामुल्ला संसदीय सीट से नेशनल कांफ्रेंस ने पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के कार्यकारी प्रधान , उमर अब्दुल्ला को चुनाव के मैदान में उतारा है। पीडीपी ने पूर्व राजय सभा सांसद, फ़राज़ अहमद मीर हो चुनावो में खड़ा किया है। पीपल्स कांफ्रेंस ने फैसला किया है कि पार्टी प्रधान और पूर्व मंत्री , सज्जाद लोन बारामूला संसदीय चुनाव सीट से उमर अब्दुल्ला के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। विधान सभा के 2014 चुनावो के बाद जब बीजेपी -पीडीपी गठबन्दन सरकार बानी थी और बीजेपी कोटे से सज्जाद लोन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। गौरतलब है कि सज्जाद लोन , प्रधानमंत्री , नरेंद्र मोदी के भी काफी नज़दीकी माने जाते है।
इस बार लद्दाख संसदीय सीट पर भी कड़ी टकर होने जा रही है। 2019 लोक सभा चुनावो में बीजेपी के उमीदवार ,जमयांग सेरिंग नामग्यल आजाद उम्मीदवार, सज्जाद हुसैन से करीब दस हजार वोटो से जीते थे जबकि 2014 संसदीय चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार, थुपस्तान छेवांग , आजाद उम्मीदवार ,गुलाम राजा से 36 वोटो से जीते थे । लेकिन इस बार बीजेपी को काफी मेहनत करनी पड़ेगी कयोकि लेह और कारगिल के लोग लद्दाख को स्टेट हुड , छठे शेड्यूल में लाना और दो संसदीय सीटे बनाने की मांग कर रहे है को लेकिन प्रदर्शन और भूख हड़ताल पर बैठे है ।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के साथ जो गठबंधन हुआ है उससे यह सीट कांग्रेस को मिल रही है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस को इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का वोट बैंक भी मिलने वाला है। कांग्रेस ने अभी तक लद्दाख संसदीय सीट से किसी भी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है लेकिन सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस इस बार अपने लद्दाख के कार्यकारी प्रधान, असगर अली करबली को चुनावों में उतार सकती है। लद्दाख संसदीय सीट पर 20 मई को पांचवे फेस में चुनाव होंगे। यह देश की एक ऐसी संसदीय सीट है जहां लिटरेसी रेट करीब 90 परसेंट मानी जा रही है ।
(जम्मू-कश्मीर के इतिहास, राजनीति और सुरक्षा का व्यापक ज्ञान रखने वाले अश्विनी कुमार जम्मू-कश्मीर के प्रमुख पत्रकारों में से एक हैं। वह नियमित रूप से राष्ट्रीय पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के लिए लिखते हैं)