गांव ट्रिब्यून विशेष
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जम्मू — लोकसभा चुनाव के परिणामों में बेहद खराब प्रदर्शन करने के बाद गुलाम नबी आज़ाद की पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। पार्टी के तीन बड़े नेता पार्टी छोड़कर वापस अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले की राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण एक विधानसभा क्षेत्र के एक प्रमुख नेता गुलाम नबी आज़ाद का साथ छोड़कर कांग्रेस में लौटने वाले है।पूर्व विधायक और मंत्री रहे इस नेता ने कांग्रेस की टिकट पर कई चुनाव लड़े थे, मगर अगस्त 2022 में जब आज़ाद ने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया तो इस प्रमुख नेता ने भी कांग्रेस से इस्तीफा देकर आज़ाद का हाथ पकड़ लिया था।
लेकिन अन्य कई नेताओं की तरह ही इस नेता का भी आज़ाद और उनकी पार्टी से मोहभंग हो गया है।इसी वजह से आज़ाद का हाथ छोड़कर वापस कांग्रेस का हाथ थामने जा रहे हैं।
बारामूला जिले के नेता के साथ दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के एक वरिष्ठ नेता की भी कांग्रेस में वापसी होने जा रही हैं। यह नेता विधानसभा के सदस्य रहने के साथ-साथ विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके हैं।
दक्षिण कश्मीर से ही अनंतनाग जिले के साथ ताल्लुक रखने वाले एक और पूर्व विधायक भी कांग्रेस में वापसी कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अगर सब कुछ ठीक रहा तो तीनों नेता अगले सप्ताह कांग्रेस में फिर से शामिल हो जाएंगे। तीनों की कांग्रेस में वापसी पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर के प्रयासों से हो रही है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि अगर कश्मीर के तीन बड़े नेता कांग्रेस में वापसी करते हैं तो गुलाम नबी आज़ाद के लिए यह एक ओर बड़ा झटका होगा। आज़ाद के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले उनके अधिकतर साथी उन्हें जनवरी 2023 में छोड़कर कांग्रेस में वापस चले गए थे। इन नेताओं में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष पीरज़ादा मोहम्मद सईद, पूर्व उप मुख्यमंत्री ताराचंद, पूर्व विधायक बलवान सिंह आदि शामिल थे।
गुलाम नबी आज़ाद का साथ छोड़ने के पीछे नेताओं के कई कारण हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भी आज़ाद की पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा जिससे पार्टी के अंदर खलबली मची हुई है। भारतीय जनता पार्टी के साथ गुलाम नबी आज़ाद के रिश्तों को लेकर भी कुछ नेताओं में नाराज़गी है।नेताओं को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है।
गौरतलब है कि गुलाम नबी आज़ाद की पार्टी ने प्रदेश की तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, मगर लोगों ने आज़ाद की पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया।
अनंतनाग-राजौरी सीट से आज़ाद की पार्टी को मात्र 2.49 प्रतिशत मत मिले जबकि श्रीनगर सीट से 2.24 प्रतिशत वोट ही मिल सके।
इसी तरह से उधमपुर लोकसभा क्षेत्र से आज़ाद की पार्टी सिर्फ 3.56 प्रतिशत मत ले सकने में कामयाब हुए।
बारामूला लोकसभा सीट पर आज़ाद ने अपनी पार्टी का कोई प्रत्याशी खड़ा करने की जगह निर्दलीय उम्मीदवार इंजीनियर राशिद को अपना समर्थन दिया था।