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गांव ट्रिब्यून विशेष
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जैसे-जैसे 4 जून की तारीख यानी लोकसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे उम्मीदवार एक बार फिर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाले वोटों की गणना में व्यस्त हो गए हैं।
कुछ उम्मीदवार पिछले रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं जबकि कुछ अन्य अपने प्रतिद्वंद्वियों को विशिष्ट क्षेत्रों में मिलने वाले मतदाताओं की गणना करने में व्यस्त हैं।
जम्मू-कश्मीर में सभी पांच लोकसभा सीटों पर कांटे की टक्कर होने जा रही है, लेकिन सभी की निगाहें प्रतिष्ठित उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट पर हैं, यहां केंद्रीय मंत्री और दो बार के लोकसभा सदस्य डॉ. जितेंद्र सिंह भाजपा के उम्मीदवार हैं।
उनका मुकाबला बेहद अनुभवी राजनेता और इस सीट का दो बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके चौधरी लाल सिंह से है।चौधरी लाल सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले यह अनुमान लगाया गया था कि इस सीट पर चुनाव एकतरफा होगा क्योंकि पिछली बार डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सीट पर 3.6 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, जो पूरे जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक रिकॉर्ड अंतर था।
हाई-वोल्टेज प्रचार के दौरान चौधरी लाल सिंह अपनी विशिष्ट प्रचार शैली के माध्यम से इस सीट पर कांग्रेस की खोई हुई जमीन वापस पाने में कामयाब रहे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चौधरी लाल सिंह डॉ. जितेंद्र सिंह से यह सीट छीन सकने में कामयाब रहेंगे ?

इस संसदीय क्षेत्र के आंकड़ों पर गौर करें तो हीरानगर विधानसभा क्षेत्र चौधरी लाल सिंह की जीत के लिए काफी अहम है।
दिलचस्प बात यह है कि चौधरी लाल सिंह की शादी हीरानगर में हुई है ।इस तरह से उनकी ससुराल इसी विधानसभा क्षेत्र में है।

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अब कठुआ के निवासी व्यंग्यपूर्वक कह रहे हैं कि अगर ससुराल वालों ने चौधरी लाल सिंह का समर्थन किया है, तो वह चुनावी लड़ाई में आसानी से पार हो जाएंगे।

इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं के पास यह सवाल पूछने का कारण भी है क्योंकि इस संसदीय सीट पर हीरानगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा भाजपा उम्मीदवार की जीत में निर्णायक भूमिका निभाता है।

आकंडे बताते हैं कि जब-जब कांग्रेस को हीरानगर विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदान का 40 प्रतिशत से अधिक वोट मिला है पार्टी उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट जीतने में कामयाब रही है।

  • वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में पड़े कुल 88,763 मतों में से भाजपा प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह को 70,683 वोट मिले थे,जो कि कुल पड़े वोटों का 79.63 प्रतिशत था।
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में जब अनुभवी राजनेता गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस के उम्मीदवार थे, उस समय कांग्रेस को कुल मतदान में से केवल 21 प्रतिशत वोट ही मिले थे। कुल पड़े 78292 मतों में से कांग्रेस को सिर्फ 16491 और बीजेपी प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह को 56568 वोट मिले थे।
  • दिलचस्प तथ्य यह है कि जब चौधरी लाल सिंह 2009 और 2004 के लोकसभा चुनाव में इस लोकसभा सीट पर चुनाव जीते तो उन्हें इस सीट पर बहुमत नहीं मिल सका।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव में कुल पड़े 53660 वोटों में से तत्कालीन बीजेपी प्रत्याशी डॉ. निर्मल सिंह को 27,699 वोट मिले थे, जो कि कुल पड़े मतों का 51.61 फीसदी था। उस समय के विजेता चौधरी लाल सिंह को 17,217 वोट मिले जो कुल मतदान का 32 प्रतिशत था।
  • 2004 के लोकसभा चुनाव में कांटे की टक्कर हुई थी, कुल पड़े 58908 मतों में से चौधरी लाल सिंह को 24005 और बीजेपी के कद्दावर नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रोफेसर चमन लाल गुप्ता को 25336 वोट मिले थे।
  • 1999 लोकसभा में हीरानगर विधानसभा क्षेत्र में कुल 42049 मत पड़े थे। कुल पड़े मतों में से प्रोफेसर चमन लाल गुप्ता को 21913 मत और तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी बलबीर सिंह को 10613 वोट मिले थे

 

हीरानगर प्रजा परिषद, जनसंघ और अब भाजपा के समय से ही संघ परिवार का गढ़ रहा है। संघ परिवार का गढ़ होने के बावजूद कई सालों तक इस सीट पर कांग्रेस नेता गिरधारी लाल डोगरा विधानसभा चुनाव जीते थे।
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