‘गांव ट्रिब्यून’ अपने पाठकों की दिलचस्पी को देखते हुए जम्मू शहर की अपराध की दुनिया के किस्से-कहानियों की एक पूरी श्रृंखला लेकर आ रहा है।आज हम एक ऐसे हत्याकांड की कहानी लेकर आए हैं जिसने नब्बे के दशक में पूरे जम्मू शहर को हिला कर रख दिया था।इस हत्याकांड के बाद जम्मू शहर में अपराध जगत पूरी तरह से बदल गया और हत्याओं व जानलेवा हमलों का एक लंबा सिलसिला चला।इस हत्याकांड के बाद ही बिल्लू नाम का एक नया नाम अपराध की दुनिया में उभरा और एक लंबे समय तक बिल्लू दहशत का पर्याय बना रहा।

 

 

ज़बरदस्त सर्दियों के दिन थे। पुराने जम्मू शहर के पक्की ढक्की व जुलाहका मोहल्ले के बीचोबीच स्थित एक डेयरी पर सुबह की गहमागहमी शुरू हो चुकी थी।दूध लेने के इंतज़ार में कुछ लोग गर्म टोपी और शाल व कंबल ओढ़कर इधर-उधर बैठे हुए थे।डेयरी के पशु भी अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। किसी पशु का दूध निकाला जा रहा था तो कोई अन्य अपना चारा खाने में व्यस्त था।

इसी बीच इलाके का एक बदमाश काला रोज़ की तरह दूध लेने डेयरी पर पहुंचा।डेयरी मालिक को दूध देने के लिए बोलकर एक तरफ खड़ा हो गया। वह इस बात से बेफिक्र था कि अगले कुछ ही पलों में उसके साथ क्या घटने वाला है।

उधर काले को देखकर शाल व कंबल ओढ़े युवकों में अचानक कुछ इशारे और फुसफुसाहट हुई।देखते ही देखते गर्म टोपी पहने और कंबल व शाल ओढ़े कुछ युवक धारदार हथियारों के साथ काले पर झपट पड़े।

अचानक हुए हमले को देख काला जान बचाने को भागा और डेयरी के ठीक सामने एक घर की ड्योढ़ी (घर का मुख्य द्वार) को खुला देख उसमें दाखिल हो गया।
(बताते चलें कि पुराने जम्मू शहर की तंग गलियों में आज भी अक्सर घरों के मुख्य दरवाज़े दिन भर खुले रहते हैं। लोग रात को सोते समय ही अपने घरों के मुख्य दरवाज़े बंद करते हैं।)

काले को घर के अंदर घुसते ही एक कमरा नज़र आया यहां एक छोटा सा बच्चा रजाई में सोया हुआ था। हमलावरों से बचने के लिए काला बिस्तर पर ही सोते हुए बच्चे की बगल में सोने का नाटक करते हुए रजाई ओढ़ कर लेट गया।

काले ने भले ही रजाई में अपने को छुपाने की अधूरी कोशिश कर ली थी मगर खतरा अभी भी टला नहीं था और कहानी में अभी एक बड़ा व तीखा मोड़ आना भी बाकी था।

कुछ ही पलों बाद हमलावर काले का पीछा करते हुए कमरे में घुस आए। हमलावरों ने कुछ ही पलों में कमरे की स्थिति का पूरा जायज़ा ले लिया।लेकिन काले के साथ बिस्तर पर एक बच्चे को गहरी नींद में साथ सोया देख हमलावर कुछ देर के लिए ठिठक गए।

बिस्तर पर गहरी नींद में सो रहे बच्चे को किसी भी तरह की कोई तकलीफ न हो इसे देखते हुए हमलावरों ने आराम से बच्चे को गोद में उठाकर घर वालों के हवाले कर दिया। इसके बाद कमरा अंदर से बंद हुआ और रजाई के भीतर काले की हत्या कर दी गई।जब कमरा खुला तो पूरा कमरा खून से लथपथ था और कमरे में रजाई की रुईं बिखर चुकी थी।

यहां पाठकों को बताते चलें कि भले ही यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से बहुत ही ज़्यादा मिलती-जुलती है मगर सच यह है कि कहानी किसी भी तरह से किसी फिल्म की कहानी न होकर जम्मू में
नब्बे के दशक में घटित हुई एक सच्ची घटना है।

इस हत्याकांड की महत्वपूर्ण बात यह थी कि हत्याकांड में जिन लोगों के नाम आए उनमें से कोई भी पेशेवर अपराधी या बदमाश नहीं था।सभी सामान्य घरों के सीधे-साधे युवक थे।अक्सर यह सभी युवा मुबारक मंडी स्थित पुरानी ट्रैफिक कोर्ट के पास काले के पिता के खोखे पर सुबह चाय पिया करते थे।इसी खोखे पर एक दिन काले ने गुस्से में इन युवाओं से बदतमीज़ी की और हाथापाई की थी।

इस घटना के बाद अक्सर काला युवकों को धमकाया करता और आते-जाते इन युवकों को तंग किया करता था।काले की हरकतों से तंग आकर ही इन युवकों ने काले का अंत करने की योजना बनाई। काले की हत्या से पूरा शहर दहल गया और कई दिनों तक लोगों में दहशत फैली रही।

भाई ने खाई बदला लेने की कसम
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काले की हत्या के बाद जम्मू के अपराध जगत में एक नया नाम उभरा-बिल्लू।अपराध जगत से जुड़ने वाला बिल्लू कोई और नहीं बल्कि काले का ही सबसे छोटा सगा भाई था ।बिल्लू द्वारा अपराध की दुनिया में कदम रखने से जम्मू शहर के अपराध जगत का नक्शा ही पूरी तरह से बदल गया।

काले की हत्या के बाद जब उसका अंतिम संस्कार हुआ तो काले के छोटे भाई बिल्लू ने हत्या का बदला लेने के लिए बकायदा भाई की जलती चिता पर कसम खाई। काले की हत्या तक बिल्लू एक सामान्य युवक था और अपने पिता के चाय व कुलचे-छोले के खोखे पर पिता की मदद किया करता था।अपराध जगत से बिल्लू का दूर-दूर तक कुछ भी लेना देना नही था।

मगर भाई की हत्या से आहत बिल्लू ने बदला लेने की ठान ली और उसने पूरी ताकत के साथ अपराध जगत में कदम रख दिया।बिल्लू ने बकायदा अपना एक गैंग बना लिया, जिसे लंबे समय तक बिल्लू गैंग के नाम से जाना जाता रहा।

काले की हत्या के बाद जम्मू शहर में बिल्लू ने भाई की हत्या का बदला लेने के उद्देश्य
से कई वारदातों को अंजाम दिया।काले की हत्या के बाद शहर में लगातार कई हत्याएं हुई और कई लोगों पर भीषण जानलेवा हमले हुए।

लगभग सभी मामले पक्का डंगा थाने के क्षेत्राधिकार में हुए।काले की हत्या भी पक्का डंगा पुलिस थाने के क्षेत्राधिकार में हुई थी। उल्लेखनीय है कि काले की हत्या में शामिल सभी हमलावर इसी क्षेत्र के रहने वाले थे।लगभग पांच से छह साल तक काले की हत्या का बदला लेने के लिए बिल्लू और उसके साथी सक्रिय रहे। इस दौरान काले की हत्या में छोटी सी भूमिका निभाने वाला शख्स भी ज़बरदस्त दहशत में जीता रहा ।

उल्लेखनीय है कि काले की हत्या होने तक जम्मू में अपराध व अपराधियों का दायरा बहुत छोटा था।अपराध जगत में पैसा व ग्लैमर दाखिल नही हुआ था और न ही ज़मीनी विवाद थे।उस समय तक जम्मू शहर की गलियों में चाकूबाजी व हाथापाई आदि होने की घटनाएं होती तो थीं, मगर मुख्य वजहें लड़कियों के साथ छेड़ाखानी व आपसी तू-तड़ाक तक ही सीमित थीं।एक मुहल्ले के लड़के दूसरे मुहल्ले में अगर बेवजह घूमते दिखाई दें तो बवाल होना आम था।

लेकिन काले की निर्मम हत्या के बाद जम्मू शहर ने अपराध की दुनिया ने एक बड़ी करवट ली और अपराध जगत में एक बड़ा बदलाव आया।जम्मू की तंग-गलियों से अपराध बाहर निकला और अपराध जगत के साथ पैसा जुड़ने लगा।

आज की कहानी बस यहीं समाप्त।आपको बिल्लू को लेकर ज़रूर उत्सुकता होगी।हम आपको निराश नहीं करेंगे और अगले कुछ दिनों में बिल्लू के बारे में विस्तार से बताएंगे। बिल्लू कैसे अपराध जगत से जुड़ा और कैसे बिल्लू जम्मू नगर में दहशत का पर्याय बन गया, यह सब कुछ आपको पढ़ने को मिलेगा।बस थोड़ा इंतज़ार।

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