बेरोजगारी के दौर में कम पूंजी और कम जगह से अच्छी आमदनी का रास्ता तलाश रहे किसानों, ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों के लिए शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कास्ट-जम्मू) एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। विश्वविद्यालय का मशरूम अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक मशरूम उत्पादन पर पांच दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें मशरूम के क्षेत्र में स्वयं का उद्यम खड़ा करने के लिए सक्षम बनाना है।

केंद्र के इंचार्ज प्रो. सचिन गुप्ता ने बताया कि यह प्रशिक्षण स्कास्ट-जम्मू स्थित मशरूम अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र में ही आयोजित होगा। कार्यक्रम के दौरान बटन, आयस्टर और ढींगरी के साथ-साथ कई विशेष किस्मों के मशरूम की खेती की बारीकियां सिखाई जाएंगी। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं देंगे, बल्कि विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ उत्पादन की व्यावहारिक तकनीकों से भी रूबरू कराएंगे, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे आत्मविश्वास के साथ अपना काम शुरू कर सकें।

प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम मशरूम उत्पादन की पूरी श्रृंखला को समेटे हुए है। इसमें सब्सट्रेट तैयार करने, स्पानिंग, फसल प्रबंधन, कटाई और कटाई उपरांत प्रबंधन, तथा कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे अहम पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा मशरूम जैवविज्ञान और उत्पादन की आवश्यकताओं, पाश्चुरीकरण एवं विसंक्रमण तकनीक और पर्यावरण नियंत्रण जैसे तकनीकी विषय भी शामिल हैं। मूल्य संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे प्रतिभागी अपनी उपज को बेहतर दाम पर बेचने के तरीके समझ सकें। साथ ही मशरूम आधारित उद्यमिता के अवसरों पर भी मार्गदर्शन मिलेगा।
कार्यक्रम का दायरा काफी व्यापक रखा गया है। इसमें किसान, विद्यार्थी, ग्रामीण युवा, उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, मौजूदा मशरूम उत्पादक और भावी उद्यमी हिस्सा ले सकते हैं। प्रशिक्षण शुल्क 3000 रुपये प्रति प्रतिभागी निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण को प्रभावी और व्यक्तिगत बनाए रखने के लिए सीटों की संख्या केवल 20 तक सीमित रखी गई है, इसलिए इच्छुक लोगों को जल्द पंजीकरण कराना होगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
प्रो. सचिन गुप्ता ने कहा कि मशरूम उत्पादन कम स्थान में अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का मजबूत जरिया बन सकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक और मूल्य संवर्धन का सही प्रशिक्षण किसानों व युवाओं को इस क्षेत्र में नए उद्यम विकसित करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।


