चोसिटी गांव में भारी तबाही; लंगर बहा, यात्रा स्थगित, दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र में बचाव अभियान जारी
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दूरस्थ गांव चोसिटी में गुरुवार को बादल फटने से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश मचैल माता यात्रा के श्रद्धालु थे। कई अन्य लोग लापता बताए जा रहे हैं। चोसिटी, जो मचैल माता मंदिर के रास्ते में अंतिम मोटर योग्य बिंदु है, उस समय बड़ी संख्या में तीर्थयात्री वहां मौजूद थे।
आपदा का विवरण
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, बादल फटने की घटना गुरुवार दोपहर को हुई, जब चोसिटी गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मचैल माता मंदिर की पैदल यात्रा शुरू करने के लिए एकत्र हुए थे। इस गांव की ऊंचाई 9,500 फीट है और यह किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है। बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने गांव में मौजूद एक लंगर (सामुदायिक रसोई) को बहा दिया, जहां कई श्रद्धालु भोजन कर रहे थे। अब तक 25 शव मलबे से बरामद किए गए हैं, लेकिन मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

बचाव अभियान
घटना के बाद तुरंत एक बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया। हालांकि, क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और ऊबड़-खाबड़ इलाके के कारण बचाव कार्य में चुनौतियां आ रही हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। अभी तक हताहतों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मचैल माता यात्रा का महत्व
मचैल माता यात्रा, हिमालयी तीर्थयात्राओं में से एक प्रमुख यात्रा है, जो माता चंडी के दर्शन के लिए आयोजित की जाती है। यह माता दुर्गा का एक स्वरूप हैं और हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती हैं। यह यात्रा हर साल भाद्रपद मास की संक्रांति (15 या 16 अगस्त) को शुरू होती है, जब मचैल में चंडी माता मंदिर के कपाट खुलते हैं। इस दौरान पड्डर क्षेत्र में एक बड़ा मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

यात्रा भद्रवाह के चिनोटे गांव से शुरू होती है, जहां ठाकुर कुलबीर सिंह के नेतृत्व में माता चंडी की पवित्र छड़ी (होली छड़ी) निकाली जाती है। यह जुलूस भजनों, ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के साथ मचैल की ओर बढ़ता है। यात्रा जम्मू से भी शुरू होती है और किश्तवाड़, अठोली, गुलाबगढ़, और अन्य पड़ावों से होकर गुजरती है। यह यात्रा लगभग 306 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 30 किलोमीटर की पैदल यात्रा शामिल है।
— Gaon Tribune गांव ट्रिब्यून (@GaonTribune) August 14, 2025
यात्रा पर प्रभाव
इस त्रासदी के कारण मचैल माता यात्रा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सुरक्षित स्थानों पर रहने और यात्रा मार्ग से बचने की अपील की है। मचैल माता मंदिर, जो जम्मू क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी तीर्थयात्रा का केंद्र है, हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस आपदा ने न केवल स्थानीय समुदाय को प्रभावित किया है, बल्कि इस पवित्र यात्रा की भावना को भी झटका दिया है।
आगे की स्थिति
बचाव दल कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। क्षेत्र में घने जंगल, देवदार, ओक और अन्य हरे-भरे पेड़ों के बीच भगा नदी का तेज बहाव बचाव कार्य को और जटिल बना रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
इस त्रासदी ने एक बार फिर प्रकृति की अप्रत्याशित शक्ति और हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी आपदाओं से निपटने की चुनौतियों को उजागर किया है।
