जगती, नगरोता के तीन कश्मीरी पंडित परिवार आज भी उस रविवार के दर्द को जी रहे हैं, जब उनके बच्चे नदी किनारे खेलने गए थे — और लौटे नहीं।
वो रविवार था। धूप खिली थी। पाँच किशोर दोस्त, मन में उमंग लिए, नगरोटा के जगती इलाके से निकले — तवी नदी के किनारे जाने के लिए। थोड़ी देर की खुशी, थोड़ा पानी, थोड़ी हँसी। बस इतनी सी ख्वाहिश थी उनकी।

पर उस दिन तवी ने कुछ और ही तय कर रखा था।
देखते ही देखते नदी की तेज़ धारा ने तीन मासूम ज़िंदगियों को अपनी आगोश में ले लिया। शाम होते-होते तीन घर उजड़ गए — तीन माँएँ रोती रह गईं, तीन बाप पत्थर हो गए।
“दो दिन बाद उसी नदी ने उन्हें लौटाया — पर निर्जीव।”
जिस पल से बच्चे लापता हुए, उनके घरों में रात उतर आई — और वो रात दो दिन तक नहीं गई। माँएँ घर की देहरी पर बैठी रहीं, बाप नदी किनारे डटे रहे। कोई सोया नहीं। सबकी आँखें सूजी हुईं थीं, फिर भी टकटकी लगाए पानी को देखते रहे — शायद कोई लहर उनके बच्चों की खबर ले आए।

पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें रात के अँधेरे में टॉर्चलाइट लिए तावी की गहराइयों में उतरती रहीं। हर पल भारी था, हर मिनट एक युग जैसा।
सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे — पहली खबर आई। गोताखोरों ने नदी की तलहटी में, 16 फीट की गहराई में, गाद में दबा बावीश कौल का शव बरामद किया। परिवार इस सदमे को संभाल भी नहीं पाया था कि दस मिनट के भीतर आदित्य पंडित का शव भी मिल गया।
जब शव किनारे लाए गए, तो माँओं की चीखें हवा को चीर गईं। बाप खड़े रहे — जैसे उनके पाँव ज़मीन में धँस गए हों। वहाँ जमा भीड़ में कोई ऐसा न था जिसकी आँखें सूखी रहीं हों।
मंगलवार की सुबह, आखिरी उम्मीद की लौ भी बुझ गई। जहाँ बच्चे उतरे थे, वहाँ से आधा किलोमीटर दूर — सोनम दत्त का शव मिला। त्रासदी अब पूरी हो चुकी थी।
“तवी बहती रही — निर्मम, बेरुखी से — जबकि उसके किनारे पर ज़िंदगियाँ टूट रही थीं।”

मंगलवार की सुबह उस नदी के किनारे एक अजीब सन्नाटा था। जहाँ कुछ दिन पहले हँसी गूँजती थी, वहाँ अब सिर्फ रुदन था। विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवारों के लोग उस पानी को देख रहे थे जिसने उनके बच्चों को निगल लिया था। आँखें खाली थीं, दिल टूटे हुए थे, शब्द बिल्कुल नहीं थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चे किनारे पर वॉलीबॉल खेल रहे थे। फिर नहाने उतरे। जो पल बेहद साधारण लगा था, वो पलों में घातक बन गया। उनके दो साथी बचकर लौट आए — बाकी तीन नहीं।
तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, जम्मू भेजे गए।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “हृदयविदारक” बताया। उन्होंने कहा — “शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। इस कठिन घड़ी में हम उनके साथ हैं।”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी शोक व्यक्त किया और प्रार्थना की कि ईश्वर इन परिवारों को इस असह्य पीड़ा को सहने की शक्ति दे।
तीन घर, एक ही दिन में, हमेशा के लिए बदल गए। तावी आज भी बह रही है — उदासीन, अपरिवर्तित। पर उसके किनारे पर खड़े वो माँ-बाप अब कभी पहले जैसे नहीं होंगे।

