200 से अधिक लापता, 65 शव बरामद,  प्रतिकूल मौसम के बीच तेज़ी से चल रहा राहत एवं बचाव कार्य

 

 

 

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र चोशोटी गांव में गुरुवार दोपहर को आए विनाशकारी बादल फटने की घटना को 46 घंटे से ज़्यादा बीत चुके हैं, लेकिन त्रासदी की पीड़ा अभी भी वैसी की वैसी है। यह गांव, जो श्रद्धेय मचैल माता मंदिर की तीर्थ यात्रा का अंतिम मोटर योग्य पड़ाव है, अब मलबे और आंसुओं का प्रतीक बन चुका है।

प्रदेश के कृषि मंत्री जावेद डार के अनुसार अब तक 65 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 100 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनमें अधिकांश मचैल यात्रा पर निकले श्रद्धालु हैं। हर बीतता हुआ पल ज़ख्मों को गहरा कर रहा है और जीवित मिलने की उम्मीदों को कम करता जा रहा है।

 

 

सड़क पर रखे शव त्रासदी की सारी दस्ता बयां कर रहे हैं

मौसम की मार के बावजूद बचाव कार्य में जुटे हैं सुरक्षाबल और स्थानीय लोग

गुरुवार रात भारी बारिश और अंधेरे के कारण राहत कार्य को रोकना पड़ा था, लेकिन शुक्रवार सुबह होते ही सेना, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमें पुनः मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गईं। खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के बावजूद जवान और स्वयंसेवक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं और पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक ले जा रहे हैं।

लदल में फंसे एक शव को निकलने का प्रयास करते हुऐ भारतीय सेना के जवान

 

 

भारतीय वायुसेना ने जम्मू, श्रीनगर और उधमपुर से तीन हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं, जो न केवल घायलों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं, बल्कि ज़रूरी राहत सामग्री भी आपूर्ति कर रहे हैं। अब तक 160 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।

गांव में मातम, लेकिन हौसले बुलंद

इस दुख की घड़ी में चोशोटी के ग्रामीणों ने साहस और सेवा की मिसाल पेश की है। अपने परिजनों को खोने के बावजूद स्थानीय लोग दूसरों की जान बचाने में लगे हैं। स्वयंसेवक रमेश कुमार की आंखें भर आईं जब उन्होंने कहा, “हमने अपने भाई-बहनों को खोया है, लेकिन हम तब तक रुकेंगे नहीं जब तक अंतिम लापता व्यक्ति नहीं मिल जाता।”

स्वयंसेवक रमेश कुमार की आंखें भर आईं जब उन्होंने कहा, “हमने अपने भाई-बहनों को खोया है, लेकिन हम तब तक रुकेंगे नहीं जब तक अंतिम लापता व्यक्ति नहीं मिल जाता।

 

चोटिलों का इलाज अथोली उप-जिला अस्पताल में चल रहा है, जबकि कुछ गंभीर घायलों को जीएमसी किश्तवाड़ और आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया है। इस आपदा ने न सिर्फ कई घरों को उजाड़ दिया, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और मचैल यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों पर भी गहरा प्रभाव डाला है। यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

 

जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक निर्माण पर उठे सवाल

विज्ञानियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं को जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और अवैज्ञानिक निर्माण को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी आपदाएं और भी भयानक रूप ले सकती हैं।

 

 

 

सरकारी अपील और राहत का आह्वान

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सूचना या सहायता के लिए वे किश्तवाड़ जिला नियंत्रण कक्ष (9858223125, 6006701934, 9797504078, 8492886895, 8493801381, 7006463710) या एनडीआरएफ हेल्पलाइन (9711077372, 011-24363260) पर संपर्क करें। राहत कार्यों में सहयोग देने की इच्छुक जनता प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में pmindia.gov.in के माध्यम से दान कर सकती है।

 


भारतीय सेना की मानवीय पहल

आपदा की जानकारी मिलते ही सेना की टुकड़ियां तत्काल प्रभावित क्षेत्र की ओर रवाना हो गईं। कठिन भू-भाग, मलबे से भरे नाले और तेज़ बारिश के बावजूद जवानों ने मोर्चा संभालते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू किया।

सेना की टीमों ने प्राथमिक उपचार, भोजन, पानी, कंबल और अन्य आवश्यक सामग्री मौके पर उपलब्ध कराई। जम्मू स्थित रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने कहा, “लापता लोगों की खोज के लिए प्रयास जारी हैं और इंजीनियरिंग उपकरणों की मदद से रास्ते साफ़ किए जा रहे हैं ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए।”

पूरा देश किश्तवाड़ के साथ खड़ा है

यह केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की पीड़ा है। देशभर से प्रार्थनाएं, सहायता और संवेदनाएं किश्तवाड़ की ओर उमड़ रही हैं। इस घड़ी में जब आशा मंद पड़ रही है, पूरा भारत किश्तवाड़ के लोगों के साथ खड़ा है – दुख बांटने और पुनर्निर्माण में सहयोग देने के लिए !

 

प्रधानमंत्री ने की स्थिति की समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात कर स्थिति की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा जी और मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला जी से किश्तवाड़ में बादल फटने और बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की। प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ज़मीनी स्तर पर कार्य जारी है।”

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ‘X’ पर पोस्ट करते हुए बताया, “माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी का फोन आया। मैंने उन्हें किश्तवाड़ की स्थिति और प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। केंद्र सरकार की सहायता और समर्थन के लिए हम आभारी हैं।”

पूर्व कृषि मंत्री जावेद डार ने बारामुला में स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 65 शव मलबे से निकाले जा चुके हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा, “रात से ही बचाव दल मौके पर काम कर रहे हैं।”

इस त्रासदी ने मचैल माता मंदिर के पास के पहाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। अस्थायी शिविर, सामुदायिक रसोई और अन्य ढांचों को बाढ़ ने बहा दिया। राहत और बचाव कार्यों में नागरिक प्रशासन, सेना, NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री का दौरा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद घोषणा की कि वे आज दोपहर किश्तवाड़ के चोसोटी गाँव के लिए रवाना होंगे। “मैं कल सुबह त्रासदी स्थल पर पहुँचकर नुकसान का जायज़ा लूँगा और बचाव कार्यों की समीक्षा करूँगा।” — उन्होंने ‘X’ पर लिखा।

उपमुख्यमंत्री ने घायलों से की मुलाकात

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शुक्रवार को जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में जाकर बादल फटने से घायल हुए लोगों का हालचाल लिया। GMC के प्राचार्य डॉ. अशुतोष गुप्ता ने उन्हें इलाज की स्थिति से अवगत कराया।

चौधरी ने बताया, “घायलों को डॉक्टरों द्वारा अच्छी देखभाल दी जा रही है। अधिकांश को आँखों, हाथ-पैर और पसलियों में चोटें आई हैं। दो मरीज ICU में हैं।”

उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ऐसी भयावह घटना की उम्मीद नहीं थी। मैं किश्तवाड़ जा रहा हूँ। मुख्यमंत्री भी रवाना हो चुके हैं। हम कल स्थल का दौरा करेंगे। माता मचैल से प्रार्थना है कि जो लोग लापता हैं, वे सुरक्षित लौटें।”

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here