डेढ़ साल का इंतज़ार, एक खुफिया सूचना और रात 10:30 बजे खत्म हुआ मूसा का खेल [ऐसे हुआ पूरा ऑपरेशन]

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पाकिस्तानी SSG का पूर्व कमांडो, चार बड़े हमलों का गुनहगार, आखिरकार बडगाम में ढेर, सज्जाद जट्ट का करीबी हाशिम मूसा मारा गया!

 

बडगाम में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मोस्ट-वांटेड आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा उर्फ आसिफ फौजी के छिपे होने की पुख्ता और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी मिलने के बाद सेना की 15 चिनार कोर ने तुरंत अभियान शुरू किया। मंगलवार रात चले इस ऑपरेशन में मूसा ढेर हो गया।

 

 

पूरी तरह खुफिया सूचना पर आधारित था ऑपरेशन

 

सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई पूरी तरह खुफिया इनपुट पर आधारित थी। सूचना मिलते ही उसे 15 चिनार कोर तक पहुंचाया गया। सेना ने बिना देरी किए कार्रवाई की और बडगाम के गुरवेथ कलां इलाके में मूसा का पता लगा लिया। 29 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे उसे मार गिराया गया।

 

 

करीब डेढ़ साल से सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर था

 

मूसा पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर था। उसे जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हाई-वैल्यू विदेशी आतंकी माना जाता था। खुफिया जानकारी के अनुसार वह LeT कमांडर सज्जाद जट्ट के लगातार संपर्क में था, जिसे पहलगाम हमले की साज़िश का अहम हैंडलर माना गया है।

 

कौन था हाशिम मूसा?

 

मूसा, जिसे आसिफ फौजी और सुलेमान के नाम से भी जाना जाता था, पाकिस्तानी नागरिक और LeT का आतंकी था। माना जाता है कि उसने 2023 में भारत में घुसपैठ की थी। खुफिया इनपुट के मुताबिक वह पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) का पूर्व कमांडो था। घुसपैठ के बाद से ही उस पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर कई हमलों में शामिल होने का आरोप था, और वह लगातार एजेंसियों का प्रमुख निशाना बना हुआ था।

 

मूसा के आतंकी हमलों का सिलसिला

 

खुफिया सूचनाओं के अनुसार वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों में शामिल रहा:

 

  • हलन, कुलगाम (4 अगस्त 2023): हमले में सेना के तीन जवान शहीद हुए।
  • डीकेजी (डेरा की गली) घात हमला (21 दिसंबर 2023): सेना के चार जवान शहीद हुए।
  • वायुसेना के काफिले पर हमला, शस्तर, पुंछ (4 मई 2024): भारतीय वायुसेना का एक जवान शहीद हुआ।
  • बोटापथरी, गुलमर्ग (24 अक्टूबर 2024): सेना के दो जवान और दो पोर्टर मारे गए।

सज्जाद जट्ट से संपर्क

 

मूसा LeT के वरिष्ठ कमांडर सज्जाद जट्ट के नियमित संपर्क में था, जो पहलगाम हमले से जुड़े आतंकी नेटवर्क की अहम कड़ी है। हालांकि मूसा उस समूह का हिस्सा नहीं था जिसने पहलगाम हमले को अंजाम दिया, लेकिन जट्ट से लगातार बातचीत के कारण वह एजेंसियों के लिए अहम टारगेट बन गया। इसी से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय LeT के पूरे नेटवर्क को समझने और उसे तोड़ने में मदद मिलनी थी।

 

सुरक्षा एजेंसियां 18 महीने से ज्यादा समय से उसकी तलाश में थीं। आखिरकार ताज़ा खुफिया सूचना से बडगाम में उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई।

 

खुफिया जानकारी पर टिका ऑपरेशन

 

मूसा के खात्मे वाला अभियान विशिष्ट और कार्रवाई योग्य खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू हुआ। सूचना तुरंत 15 चिनार कोर को दी गई, जिसने बिना समय गंवाए कार्रवाई की। ऑपरेशन का अंत गुरवेथ कलां में रात करीब 10:30 बजे मूसा के मारे जाने के साथ हुआ।

 

मौके से बरामद सामान

 

मुठभेड़ स्थल से एक AK-47 राइफल, दो AK मैगजीन, एक LoRa/अल्ट्रा हैंडसेट, एक LoRa/अल्ट्रा मोबाइल डिवाइस और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।

 

 

 

तीन अन्य आतंकियों सुलेमान, हमज़ा अफ़ग़ानी और ज़िब्रान को कश्मीर के दाचीगाम में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान “ऑपरेशन महादेव” में कल ही मार गिराया गया था।

सुलेमान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ‘ए’ श्रेणी का कमांडर था और पहलगाम तथा गगनगीर के आतंकी हमलों में शामिल था। अफ़ग़ानी और ज़िब्रान भी LeT के ‘ए’ श्रेणी के आतंकी थे, जिन्होंने बैसरन घाटी में हमारे निर्दोष नागरिकों की जान ली थी।

  • कैसे चला ऑपरेशन महादेव
    22 अप्रैल 2025: दोपहर करीब 1 बजे पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। गृह मंत्री अमित शाह खुद शाम 5:30 बजे श्रीनगर पहुंच गए।
    23 अप्रैल 2025: सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस समेत सभी सुरक्षा बलों की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकी किसी भी हालत में देश से भागकर पाकिस्तान न जा पाएं।
    22 मई 2025: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को मानवीय खुफिया सूचना (ह्यूमिंट) से दाचीगाम इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। इसी दिन ऑपरेशन महादेव शुरू हुआ।
    22 मई से 22 जुलाई: IB और सेना ने दो महीने तक लगातार इस सूचना की पुष्टि की कोशिश की। दाचीगाम में अल्ट्रा सिग्नल पकड़ने के लिए एजेंसियों ने विशेष उपकरण लगाए थे। IB, सेना और सीआरपीएफ के अधिकारी व जवान कड़ाके की ठंड और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पैदल घूमते रहे, ताकि आतंकियों के सिग्नल पकड़े जा सकें।
    22 जुलाई 2025: सेंसरों के ज़रिये सुरक्षा बलों को कामयाबी मिली और आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हो गई।

इसके बाद 4 पैरा के नेतृत्व में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने मिलकर आतंकियों को घेर लिया और कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया।

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