पंजाब की राजनीति में आज एक विदेशी शराब की बोतल सियासी तंज़ का सबसे चर्चित प्रतीक बन गई। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने घंटी जैसे ढक्कन वाली एक महंगी आयातित शराब की बोतल के सहारे मुख्यमंत्री भगवंत मान पर करारा राजनीतिक व्यंग्य कसा। इस तंज़ की धार पंजाबी भाषा के उस दोहरे अर्थ में छिपी थी, जिसे बिट्टू ने बड़ी चतुराई से इस्तेमाल किया।
“टल्ली” शब्द का एक अर्थ नशे में धुत होना है, तो दूसरा घंटी बजाना या किसी को बुलावा देना।
इस बोतल के ज़रिये बिट्टू ने दिल्ली के IGI हवाई अड्डे पर कस्टम ड्यूटी को लेकर सामने आए कथित विवाद की ओर इशारा किया। बताया गया है कि फ्रांस से परिवार के साथ लौटने पर मुख्यमंत्री मान को हवाई अड्डे पर करीब तीन घंटे तक रोके रखा गया था। हालांकि मामले का यह पहलू रिपोर्टों पर आधारित है।
बिट्टू का निशाना केवल बोतल तक सीमित नहीं था। “टल्ली” प्रतीक से उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार के शासन-तंत्र की उस संस्कृति को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की, जिसे वे पंजाब की बदहाली की जड़ बताते हैं। उनके व्यंग्य का सार यह था कि मुख्यमंत्री के आचरण और कामकाज के तौर-तरीकों से राज्य प्रशासन के संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
घंटी को रूपक बनाते हुए बिट्टू ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर नशे की हालत में मुख्यमंत्री डीजीपी, मुख्य सचिव और राजबीर घुमान जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को ‘घंटी’ बजाकर तलब करते हैं और उन्हें निर्देश देते हैं। इन निर्देशों में विरोधियों और निर्दोष लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराने से लेकर नशा तस्करी, अवैध खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई तक शामिल बताए गए। यह सब बिट्टू के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
व्यंग्य यहीं नहीं रुका। बिट्टू ने यह सवाल भी उछाला कि कहीं अवैध कमाई का प्रवाह दिल्ली में बैठे ताकतवर राजनीतिक संरक्षकों तक तो नहीं पहुंच रहा। उनका सीधा सवाल था कि पंजाब की सरकार आख़िर किसके हितों की सेवा कर रही है।
बिट्टू का संदेश साफ था कि बोतल हंसी-ठिठोली का साधन भर नहीं थी। वह मुख्यमंत्री के कथित आचरण, सरकारी मशीनरी के कामकाज, पद के दुरुपयोग और AAP सरकार की जवाबदेही पर सीधी टिप्पणी थी। ‘तल्ली’ के दोनों अर्थों को जोड़कर उन्होंने एक जानी-पहचानी पंजाबी अभिव्यक्ति को राजनीतिक रूपक में बदल दिया और हास्य व प्रतीक की आड़ में शासन, कानून-व्यवस्था और सत्ताधारियों की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
जब संसद में भी गूंजा था यह मुद्दा
यह पहला मौक़ा नहीं है जब भगवंत मान की छवि को लेकर इस तरह के सवाल उठे हैं। साल 2017 में तत्कालीन सांसद के तौर पर मान संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निशाने पर आ चुके थे। 7 फरवरी 2017 को लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में प्रधानमंत्री ने चार्वाक दर्शन की प्रसिद्ध उक्ति का हवाला देते हुए कहा था, “मैं तो लोगों से कहता हूं कि घी पियो, लेकिन अगर भगवंत मान लोगों से कहेंगे तो वे कहेंगे कि कुछ और पियो।” इस टिप्पणी को मान की कथित शराबखोरी पर कटाक्ष के रूप में देखा गया था।
इससे पहले शिरोमणि अकाली दल ने मान पर सदन में नशे की हालत में आने का आरोप लगाया था। AAP के ही तत्कालीन सहयोगी सांसद हरिंदर सिंह खालसा ने भी ऐसे आरोप लगाए थे। मान इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के अगले ही दिन मान ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिखकर इसे ‘अपमानजनक’ बताया और कार्यवाही से हटाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा संभव न हो, तो उन्हें विशेषाधिकार समिति के समक्ष जाने की अनुमति दी जाए। मान ने प्रधानमंत्री के भाषण को ‘सरपंच स्तर’ का बताया था और कहा था कि यह मोरारी बापू के प्रवचन जैसा था।
इसी पृष्ठभूमि में जुलाई 2016 का वह प्रकरण भी याद किया जा रहा है, जब मान ने संसद परिसर का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इससे सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था और मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी।
अब सत्ता के शीर्ष पर बैठे मान के सामने वही पुराने सवाल नए रूप में खड़े हैं। बिट्टू की ‘तल्ली’ ने उस बहस को फिर हवा दे दी है। देखना यह है कि मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी इस पर क्या जवाब देते हैं।



